Sundaram - A story of Change
A story of change from Susmit Foundation.

सुस्मित फाउंडेशन की एक प्रेरक यात्रा
सुंदरम — सीखने, समझने और आगे बढ़ने की यात्रा
सुंदरम को समझने के लिए उसके करीब रहना पड़ता है। वह भीड़ में होते हुए भी अपनी अलग दुनिया में रहने वाला बच्चा है—एक ऐसा बच्चा, जिसके सीखने, बोलने और अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का अपना तरीका है।लगभग एक साल पहले, जब सुंदरम दिल्ली आया, तो शायद नियति उसे सुस्मित फाउंडेशन तक ले आई। यहाँ से उसकी सीखने और आत्मविश्वास पाने की एक नई यात्रा शुरू हुई।
शुरुआत आसान नहीं थी। सुंदरम को अक्षरों से परिचित कराना और उन्हें पहचानना सिखाना अपने आप में एक लंबी प्रक्रिया थी। मंडल सर रोज़ उसके साथ मेहनत करते थे और आज भी लगातार उसका मार्गदर्शन कर रहे हैं। एक-एक अक्षर को समझने में उसे काफी समय लगा। वह बोलते समय हिचकिचाता था, उसे बोलने में कठिनाई होती थी और हिंदी में अपनी बात कहना उसके लिए सहज नहीं था।कई बार दूसरे बच्चे उसे चिढ़ाते थे, उसके रंग को लेकर टिप्पणियाँ करते थे या उसके साथ ठीक व्यवहार नहीं करते थे। ऐसे क्षणों में सुंदरम भी प्रतिक्रिया देता था। उसके व्यवहार को समझना आसान नहीं था—लेकिन हमने यह समझने की कोशिश की कि उसके पीछे कौन-सी भावनाएँ, कठिनाइयाँ और ज़रूरतें थीं।
हमने उसे जल्दबाज़ी में बदलने के बजाय पहले उसे समझना चुना। हमने ध्यान दिया कि वह किस तरह सीखता है, किस तरह बात समझता है, किन बातों से खुश होता है और किन परिस्थितियों में असहज महसूस करता है। हमने उससे जुड़ने के तरीके खोजे, उसकी उम्र के बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में शामिल किया और उसे साथियों के बीच सीखने व आगे बढ़ने के अवसर दिए। धीरे-धीरे उसके लिए स्कूल में दाखिले का रास्ता भी खुला।
समय के साथ सुंदरम में बदलाव दिखाई देने लगा। जो बच्चा अपनी बात कहने में झिझकता था, वह अब बोलने और अपनी बात रखने की कोशिश करने लगा। उसकी भावनाएँ पहले भी थीं; अब वह उन्हें अधिक सहजता से व्यक्त करने लगा। वह दूसरों की परवाह करता है, अपनापन दिखाता है, सम्मान करना सीख रहा है और अपनी जिम्मेदारियाँ समझने लगा है।
एक दिन बच्चों के साथ हम कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी और विमान में हुई घटना पर चर्चा कर रहे थे। तभी सुंदरम ने स्वयं आगे बढ़कर उस घटना के बारे में बोलना शुरू किया। हम सब उसे ध्यान से सुन रहे थे। हमारी आँखों में आँसू थे—क्योंकि हमें वह समय याद आ रहा था, जब एक-एक अक्षर पहचानना भी उसके लिए कठिन था। और आज वही बच्चा अपनी बात सबके सामने रखने का साहस दिखा रहा था।
एक साल में हमने कोई चमत्कार नहीं किया। हमने उसे समय दिया, धैर्य दिया, अपनापन दिया, शिक्षा दी और सबसे ज़रूरी—उसे समझने की कोशिश की। यह बदलाव केवल हमारी मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि सुंदरम के अपने प्रयासों, उसकी सीखने की इच्छा और उसके भीतर मौजूद संभावनाओं की भी कहानी है।
शायद यही सुस्मित फाउंडेशन की असली यात्रा है। हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें समझना भी है। हर बच्चा अपने भीतर एक कहानी और अनगिनत संभावनाएँ लेकर आता है। कभी-कभी उन संभावनाओं को आगे आने के लिए बस किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत होती है, जो उसके पास बैठे, उसकी बात सुने और उस पर विश्वास करे।
सुंदरम की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है—यह तो बस शुरुआत है। ऐसी बहुत-सी कहानियाँ अभी बाकी हैं। बच्चों के साथ सेवा, सीखने और बदलाव की यह यात्रा उस निःस्वार्थ अवसर का हिस्सा है, जो हमें मिला है। हम चाहते हैं कि हर बच्चा सम्मान के साथ सीखे, आगे बढ़े और अपने सपनों को उड़ान दे।
सुस्मित फाउंडेशन — हर बच्चे को समझने, सँवारने और उसके सपनों को उड़ान देने की एक निरंतर कोशिश।